क्या दहेज उचित है?? 🤔🤔
दहेज रूपी दानव का शिकार बनती बेटियां 👇👇
दहेज की समस्या सभी धर्मों में है पूरा समाज शादी के नाम पर होने वाले सौदेबाजी का तमाशा देखने आता है और खा पीकर जश्न मना कर चला जाता है। वर्तमान में दहेज प्रथा ने उघ्ररूप धारण कर रखा है। लाखों लोग दहेज लेते ओर देते है। अमीर लोगों को तो दहेज देने में कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन जो परिवार या माता-पिता गरीब है, तो उनके लिए तो दहेज एक पहाड़ बन कर खड़ा हो जाता है। शादी में बेटी भी दे देते हैं, ओर अपनी सारी जमीन भी बैच देते हैं।
दहेज एक बहुत बड़ा पाप है। अगर ससुराल वालों को दहेज ना दे ,तो वो लड़की को परेशान करते है , दहेज के भूके भेड़िए इतने नीचे गिर जाते है कि अपनी बहू को जला देते हैं ,सिर्फ दहेज के लिए एक इंसान कि जान ले लेते हैं। उस परिवार पर किया गुजरती होगी जिनकी जमीन भी गई, ओर बेटी भी।
आज के समय में दहेज लेना बिल्कुल भी उचित नहीं है। इसे बंद करना ही उचित है। दहेज के कारण लाखों परिवार ना जाने बर्बाद हो जाते हैं। दहेज के भूखों को बेटी नहीं दहेज से प्यार होता है।
सरकार भी दहेज जैसी कुरीति को समाप्त नहीं कर पा रहे हैं। आज के वर्तमान समय में दहेज जैसी कुरीति को केवल एक संत ही समाप्त कर सकते हैं। उनके लाखों अनुयायी ना तो दहेज लेते हैं और ना ही दहेज देते हैं। उन संत के अनुयायी कहते हैं कि ये हमारे गुरू जी के द्वारा दि गई शिक्षा है। वो सिर्फ गुरू वाणी में ही शादी करके बेटी को घर ले जाते है।
वो संत कोई ओर नहीं जगत् गुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही है। जिन्होंने दहेज जैसी प्रथा पर रोक लगाई है। संत रामपाल जी महाराज के जो अनुयायी हो जाते हैं, वो सब विकारों से दूर है। संत जी के अनुयायी दहेज को एक महापाप समझते हैं।
उनकी शादी एक दम साधारण तरिके से होती है, ना बेंड-बाजा, ना घोडी़, ना कोई आडंबर , ना दुल्हन कोई चमक-दमक के कपड़े पहनती है, ना ही ,मेंहदी लगाती है। ये शादी 17 मिनट में गुरू वाणी के द्वारा कि जाती है जिसे रमेणी (शादी) कहते है। संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार में बहुत बड़ा योगदान है। आप भी संत रामपाल जी महाराज से नाम दिक्षा लेकर अपना कल्याण करवाए।


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