बकरा ईद कितना सबाब देती है।

मुस्लिम समाज का धुम-धाम से मनाया जाने वाला त्यौहार बकरा ईद है। इसमें करोडो़ मुस्लिम भाई बकरे कि कुर्बानी देते हैं, उनका यह मानना होता है कि बकरे कि कुर्बानी करने से हमें सबाब मिलता है। तथा साथ ही अल्लाह उनसे खुश होता है। मुस्लिम लोगों के नबी थे: नबी मोहम्मद। मुस्लिम समाज कि यह परम्परा है कि, ये कुरान को पढ़ कर बकरे को हलाल करते हैं जिससे उसकी रूह जन्नत में जाती है तथा उनको सबाब (पूण्य ) मिलता है। मुस्लिम लोग यह सोचते हैं कि, बकरे कि कुर्बानी करने से अल्लाह खुश होता है तथा उनके काम स्वारता है। 
भारत के लाखों-करोडो़ मुस्लमान बकरे कि कुर्बानी करना पूण्य समझते है। हिंदू समाज में भी बकरे आदी कि कुर्बानी देते हैं। लेकिन मुस्लमान यह सोचते हैं कि, हिंदु बकरे कि गर्दन जल्दी से काट लेते है। जिससे बकरे को दर्द होता है। मुस्लिम समाज बकरे कि गर्दन धीरे-धीरे काटते है उनका मानना है कि बकरे कि गर्दन धीरे-धीरे काटने से उसे दर्द नहीं होता ओर उसकी रूह (शरीर) जन्नत (स्वर्ग) में चली जाती है।
 मुस्लिम भाईयों को ये सुनकर आश्चर्य होगा कि नबी मोहम्मद ने कभी मांस नहीं खाया, ओर ना ही उनके 1 लाख 80 हजार शिष्यों ने कभी मांस को छुआ। नबी मोहम्मद जी अल्लाह (भगवान) कि बहुत प्यारी (प्रिय) आत्मा थी।नबी मोहम्मद ने ना कभी मांस खाया ओर ना ही मुस्लिम समाज को मांस खाने का आदेश दिया। कुरान में कही पर भी इस बात का प्रमाण नहीं मिलता कि तुम (मुस्लमान) मांस खाओ। 
नबी मोहम्मद नमस्कार है, राम रसुल कहाया। एक लाख अस्सी को सौगंध जी नही कर्ज चलाया। 
 अगर तुम (मुस्लमान) बकरे को हलाल करना सवाब ओर कुरान पढ़ कर उसकी रूह जन्नत में जाती है तो आप अपने परिवार को हलाल करवाओं। क्योंकि कही ना कही आपका भी जन्नत में जाना है। बकरे कि गर्दन जट से काटो या धीरे-धीरे दर्द दोनों को एक ही होता है। आपका अल्लाह इतना बेरहम तो नहीं होगा जो बेजुबान जानवरों कि बली लेता है। बकरे को हलाला करना कही पर भी नहीं लिखा है। आज के वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज वेदों का सही ज्ञान बता रहे हैं। उनके अनुयाई कभी मांस को छुते भी नहीं है।
 संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि मांस खाना महापाप है। ओर जो मुसलमान तथा हिंदू बकरे कि कुर्बानी देते हैं। ये सात जन्मों में भी जन्नत (स्वर्ग) नही जा सकते। कुर्बानी का ज़िक्र किसी भी वेद में नहीं है। आप (मुसलमान, हिंदू) जो कुर्बानी देते हो बकरे कि इससे आपको बहुत पाप लगेगा। ये सभी भगवान के बच्चे हैं। मुस्लिम समाज के लोग बकरे को हलाल करके बाद में जोर से चिल्लाते है कि हे अल्लाह इस बकरे कि रूह को जन्नत में अस्थान देना, जैसे कि अल्लाह इनके आदेश से ही चलता हो। ये पाप करके आप अल्लाह को खुश करते हो। जो कभी नहीं हो सकता।।
 संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान ग्रहण करके बहुत से मुस्लिम भाईयों ने मांस खाना त्याग दिया है तथा अल्लाह कि सच्ची इबादत करते हैं। आप भी संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर सच्चे अल्लाह कि भक्ति करों। इससे ही आपका कल्याण होगा।
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