खराब शिक्षा स्तर

👉खराब शिक्षा स्तर 👈आज वर्तमान समय में शिक्षा का स्तर दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। भगवान ने शिक्षा हमें उन्हें पहचानने के लिए दी है,लेकिन शिक्षा का हम दुरुपयोग कर रहे जब हमारे पहले के लोग अनपढ़ थे, तो वृद्ध लोगों का आदर-सत्कार होता था। लड़की घर से बहार नहीं निकलती थी। बड़ो को भगवान की तरह मानते थे , ओर उनकी हर बातों को समझते थे। लेकिन आज के समय में ये सब नष्ट हो चुका है। बड़ो का कोई महत्व ही नहीं रहा। लड़कियाँ-लड़के सरेआम नाचते है। आज की पीढ़ी बड़ो का सत्कार करना ही मानों भूल गई है। सभी को बस पैसे दिखाई देते है। लाज-शर्म तक नहीं रही। 
 पूूूरातन काल के लोग भगवान से डरने वाले होते थे, लेकिन आज के समय में भगवान भूल चुके है। शिक्षा का महत्व केवल भगवान को समझना है।इसके आगे शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। भगवान ने हमें शिक्षा इसलिए दी है,ताकि हम असली भगवान को पहचान सके , ओर हमारे सतग्रंथो (ऋग्वेदए यजुर्वेद, सामवेद, अर्थवेद) को समझकर असली भगवान की पहचान कर सके। वर्ष पूर्व जब कबीर साहेब जिन्हे वेदों में (कविर्देव) कहां जाता है आए थे , उस समय शिक्षा का कोई स्तर नहीं था, सभी लोग अनपढ़ थे। उन्हे वेदों का कोई ज्ञान नहीं था। कबीर साहेब जी वेदों से प्रमाणित ज्ञान देते थे।लेकिन हमारे धर्म गुरूओं ने उनका विरोध किया ओर कहां की कबीर तो झूठा है, ओर वेद संस्कृत में है ये क्या जाने वेदों के बारे में। सभी ने सोचा की कबीर तो अनपढ़ है ओर वेद संस्कृत में है ये तो वेदों के बारें में नहीं जानता होगा। हमारें साधु-संत तो संस्कृत के ज्ञाता है। इस तरह सभी लोग कबीर साहेब के विरोधी हो गए।

 इसी के कारण कबीर साहेब ने कलयुग में शिक्षा की क्रांति लाई है। छोटे.छोटे बच्चे आज विघालय जा रहे हैं। शिक्षा का महत्व केवल भगवान को समझना है,की असली भगवान कौन है, कहां रहता है, कैसे मिलता है, किसने देखा है,इसके आगे शिक्षा किसी काम की नहीं है। हमें अपने असली भगवान को पहचानना है ओर उनकी भक्ति करके सतलोक जाना है।

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